सागर सी गहराई हो
पर्वत सी ऊँचाई हो
रोम - रोम में खुशहाली हो
हर दिल में सच्चाई हो

सोमवार, 3 मई 2010

मुक्तक

इज्म की बैसाखियों से ,चाँद पाया आपने  |
संदिग्ध मेघों के सहारे ,रवि छिपाया आपने  |
क्षणिक है आनंद तेरा ,तुम  यह न भूलो  ,,
शेष कुछ भी न बचेगा ,तूफां आने की देर है  |

8 टिप्‍पणियां:

  1. अच्छा मुक्तक है

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  2. वक्त का तूफ़ान सभी संदिग्ध बादलों को हटा देगा ...
    बहुत सुन्दर ... बधाई !

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  3. सागर सी गहराई हो
    पर्वत सी ऊँचाई हो
    रोम - रोम में खुशहाली हो
    हर दिल में सच्चाई हो
    कथनी और करनी एक होगी इस विश्वास के साथ - आभार और धन्यवाद्

    उत्तर देंहटाएं
  4. शेष कुछ भी न बचेगा ,तूफां आने की देर है |
    जी बिलकुल

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  5. बहुत अच्छी प्रस्तुति संवेदनशील हृदयस्पर्शी मन के भावों को बहुत गहराई से लिखा है

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मेरे बारे में

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नाम : आदेश कुमार पंकज पिता का नाम :( स्व०) श्री किशोरी लाल गुप्ता माता का नाम : श्रीमती पुष्पावती गुप्ता जन्म तिथि : ३०.०६ 1963 जन्म स्थान : शाहजहाँपुर (उ .प्र .) शिक्षा : एम ० एस - सी० ( गणित शास्त्र ) एम ० ए० ( अर्थ शास्त्र ) बी० एड० साहित्यिक परिचय : अनेकों कहानी व् कविताएँ विभिन्न पत्र - पत्रिकाओं में प्रकाशित | आकाशवाणी लखनऊ से बाल कविताएँ प्रचारित | अनेकों कवि सम्मेलनों कि अध्यक्षता व् संचालन | कस्तूरी कंचन आगमन संस्था द्वारा प्रकाशित एवम दोहा कलश संयुक्त दोहाकारों के रूप में प्रकाशाधीन | पुरस्कार : अखिल भारतीय वैश्य समाज शाहजहाँपुर द्वारा वैश्य रत्न से सम्मानित | कई कवि सम्मेलनों में विशेष सम्मान | माननीय शिक्षा मंत्री भारत सरकार श्रीमती स्मृति ईरानी द्वारा सम्मानित | विधालय प्रबंधन द्वारा लगातार आठ वर्षों से सम्मानित | वर्तमान में आदित्य बिरला पब्लिक स्कूल , रेनुसागर , सोनभद्र (उ ,प्र .) में प्रवक्ता गणित शास्त्र के पद पर कार्य रत | संपर्क : जूनियर ४५ - ए रेनुसागर ,सोनभद्र (उ.प्र.)- २३१२१८ मोब .नंबर . ९४५५५६७९८१

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