सागर सी गहराई हो
पर्वत सी ऊँचाई हो
रोम - रोम में खुशहाली हो
हर दिल में सच्चाई हो

बुधवार, 12 मई 2010

दोहा

प्राणी ऐसा जगत में , जन्म न लिया कोय  | 
होवे पूरा सदगुणी , अवगुण एक न होय  ||
पंकज विपदा  साथ दे , उसको अपना मान |
जस सुनार घिस- घिस करे ,सोने की पहचान  ||

बाबू

हैं गरीबी से जब सब निढाल बाबू |
गाल कैसे तुम्हारे गुलाल बाबू  | 
पान खाये लकालक बने घूमते  , 
कौन मुर्गा किया है हलाल बाबू  |
थोड़े वेतन से बंगला खड़ा कर लिया , 
खूब तुमने किया है कमाल बाबू  | 
हम तो रोटी की उलझन न सुलझा सके  ,
तुमने हल कर लिये सब सवाल बाबू  |
वक्त हमको रहा पीट हर मोड़ पर , 
तुमको छू भी सके क्या मजाल बाबू  |
जिन्दगी वह तुम्हारे लिये स्वर्ग है  , 
 हम तो जन्मों - जन्म  के बबाल बाबू  |

शनिवार, 8 मई 2010

मम्मी

आज मैं अपने ब्लॉग पर १००  वीं कविता प्रस्तुत करते हुए अपार प्रसन्नता का अनुभव कर रहा हूँ  | यह सब आप महान साहित्यकारों के प्यार ,सहयोग और आशीर्वाद के कारण ही संभव हो सका है , इसके लिये मैं आप सबका तहे दिल से आभार प्रगट करते हुए शुक्रिया अदा करता हूँ और आशा करता हूँ की भविष्य में भी ऐसे ही सहयोग प्रदान करते रहेंगे  | आज मातृ दिवस के विशेष अवसर पर  मैं पूजनीय मम्मी के लिये एक कविता प्रस्तुत कर रहा हूँ  | आप सभी को मातृ दिवस की हर्दिक शुभकामनायें  |
प्यारी - प्यारी मेरी मम्मी |
सारे जग से न्यारी मम्मी  |
  तुझसे ऊँचा कोई नहीं है ,
बहुत दुलारी मेरी मम्मी  |
रोज सवेरे जगती मम्मी  |
मुझमें ध्यान लगाती मम्मी |
एक -एक आँसू पर मेरे  ,
आँसू- धार बहाती  मम्मी   |
गुर्वोपरि है मेरी मम्मी  |
देवोपरि है मेरी मम्मी  |
चलना उसने मुझे सिखाया ,
मेरी प्राणाधार  है मम्मी  |
सभी दुःख हर लेती मम्मी |
हम पर प्यार लुटाती मम्मी  |
अर्पण कर देती है  तन -मन ,
ममता -मूर्ति है मेरी मम्मी  |

दोहा

गोयटा जलता देखकर , गोबर हँसता जाय |
पंकज क्यों है हँस रहा , कल तेरी बारी आय ||  

शुक्रवार, 7 मई 2010

आँसू


आँसू  
विभीषण है ,
लंका का  |
निकलते ही 
कर देता है  ,
रहस्योदघाटन 
आंतरिक मन का |
थके जीवन का  |

अनिवार्य

भ्रष्टाचार 
उन्नति का ,
पर्याय 
बन गया है  |
इसीलिए -
महँगाई  होना 
अनिवार्य
हो गया है  |

चुभ रही है रोशनी

 

 पेट में मचने लगी है कुलबुली  |
दे रही दुःख नीति उनकी दुलमुली  |
हर व्यवस्था पंगु है सड़ती हुई   ,
हो पड़ी ज्यों लाश कोई अधजली  |
चैन से भी  बैठने   देती   नहीं    ,
भूख की विकराल चिंता चुलबुली  |
होंठ से प्याला लगायें किस तरह ,
नाक पार बैठी हुई है छिपकली    |
हर अँधेरे को बुला लो इस जगह ,
चुभ रही है रोशनी यह दिलजली  |
लग रहा है क्रान्ति कोई ला रहा  ,
भीड़ में होने लगी है खलबली  |

मुक्तक

बदलते हुए परिवेश में , जरा देश देखिये  |
फैशन रहा है बोल  ,    जरा केश देखिये  |
मखमली सेज पर महलों में सो रहे हैं जो,
वह दे रहें हैं युद्ध का  ,  आदेश देखिये  |

सोमवार, 3 मई 2010

मुक्तक

इज्म की बैसाखियों से ,चाँद पाया आपने  |
संदिग्ध मेघों के सहारे ,रवि छिपाया आपने  |
क्षणिक है आनंद तेरा ,तुम  यह न भूलो  ,,
शेष कुछ भी न बचेगा ,तूफां आने की देर है  |

अब तो आकर के जरा

तन्हाइयों के बीच गुम- सुम ,
मैं कब तलक  बैठा रहूँ  |
अब तो आकर के जरा  ,
कुछ तो मुझे समझाइये |
नयन व्याकुल हो रहें हैं ,
दरश को -तेरे लिये   |
अब तो आकर के जरा ,
दर्शन मुझे दिखलाइये  |
गम मिला जीवन में मुझको ,
शिकवा नहीं करता हूँ मैं  |
अब तो आकर के जरा ,
उस दर्द को सहलाइये |
आँसू नयन के चाहते हैं ,
राज कहना सब जगह  |
अब तो आकर के जरा ,
पलकों पर मेरी छा जाइये  |
 

शनिवार, 1 मई 2010

उत्थान

हिन्दी संस्थान के ,
अध्यक्ष ने ,
हिन्दी उत्थान का ,
 बीड़ा उठाया है  |
इसीलिए ,उसने
अपने बच्चे को ,
एक ,
अच्छे कान्वेंट में ,
भिजवाया है  |

व्यापार

देखो मानुष कर रहा  ,है  मौतों का व्यापार |
पंकज यह क्या हो रहा , हर घर अत्याचार  ||
दूल्हा देखो बिक रहा ,खड़ा है बीच बाज़ार  |
लाख -लाख का मोल है ,कैसा यह व्यापार  ||

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मेरे बारे में

मेरी फ़ोटो
नाम : आदेश कुमार पंकज पिता का नाम :( स्व०) श्री किशोरी लाल गुप्ता माता का नाम : श्रीमती पुष्पावती गुप्ता जन्म तिथि : ३०.०६ 1963 जन्म स्थान : शाहजहाँपुर (उ .प्र .) शिक्षा : एम ० एस - सी० ( गणित शास्त्र ) एम ० ए० ( अर्थ शास्त्र ) बी० एड० साहित्यिक परिचय : अनेकों कहानी व् कविताएँ विभिन्न पत्र - पत्रिकाओं में प्रकाशित | आकाशवाणी लखनऊ से बाल कविताएँ प्रचारित | अनेकों कवि सम्मेलनों कि अध्यक्षता व् संचालन | कस्तूरी कंचन आगमन संस्था द्वारा प्रकाशित एवम दोहा कलश संयुक्त दोहाकारों के रूप में प्रकाशाधीन | पुरस्कार : अखिल भारतीय वैश्य समाज शाहजहाँपुर द्वारा वैश्य रत्न से सम्मानित | कई कवि सम्मेलनों में विशेष सम्मान | माननीय शिक्षा मंत्री भारत सरकार श्रीमती स्मृति ईरानी द्वारा सम्मानित | विधालय प्रबंधन द्वारा लगातार आठ वर्षों से सम्मानित | वर्तमान में आदित्य बिरला पब्लिक स्कूल , रेनुसागर , सोनभद्र (उ ,प्र .) में प्रवक्ता गणित शास्त्र के पद पर कार्य रत | संपर्क : जूनियर ४५ - ए रेनुसागर ,सोनभद्र (उ.प्र.)- २३१२१८ मोब .नंबर . ९४५५५६७९८१

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