ARNAVA

सागर सी गहराई हो
पर्वत सी ऊँचाई हो
रोम - रोम में खुशहाली हो
हर दिल में सच्चाई हो

शुक्रवार, 10 जून 2016

घनाक्षरी

गोकुल के ग्वाल बाल,संग खेलें नंद लाल ,
कदम्ब पर बैठ कर , वो वंशी बजाते  हैं । 
बरसात हो रही थी , घनी रात हो रही थी , 
 इक - ऊँगली पर , गोवर - धन  उठाते हैं।
 घर -  घर छिपकर  ,  नए - रूप धर कर ,
 सब मित्रों के संग मिल , माखन चुराते हैं।  
गलियों में घूम - घूम नाच रहे झूम - झूम ,
 सभी गोपियों के संग ,वह  रास रचाते हैं । 
आदेश कुमार पंकज 

घनाक्षरी

वो अयोध्या के चन्दन,वो कौशल्या के नंदन ,श्री राम प्रभुजी हम सबको हर्षाते हैं |
राज मोह  छोड़कर ,वो  आज्ञा को मानकर ,लखन सहित सीता ,राम वन जातें हैं |
रावण को मारकर, संतों को उबारकर , वो  भक़्त बिभीषण को,  राज दिलवाते हैं |
लोक मत सुनकर, निर्दयी मन बनके , वो सीता को त्यागने का, फैसला सुनाते हैं |
आदेश कुमार पंकज 

सोमवार, 28 जुलाई 2014

मुक्तक

सत्ता के लोलुप लोगों के , क्या विचार हैं आप देखिये |
मर्यादाओं का चीर हरण ,करते यह तार तार देखिये |          
कौन भला है ,कौन बुरा है ,सब तो हैं चट्टे - बट्टे ,
भाई को भाई से मरवाने ,का करते व्यापार देखिये ||

मुक्तक

आदमी को आदमी से , प्यार होना चाहिए |
हर भवन की नींव का , आधार होना चाहिए |      
जिंदगी के सुख - दुःख , बाँट ले हम साथ मिल ,
दोस्ती हो या दुश्मनी हो , भरपूर होना चाहिए ||

गज़ल

आप मुझसे क्यों हैं रूठें , क्या खता है हो गयी |    
बिन बताये ही मुझे वह , क्यों सजा है दे गयी |
आप यदि कहते मुझे तो , एक पग पर नाचता ,,
पर बेरुखी यह इस तरह , बेबफा क्यों हो गयी |
चाँद - सूरज और तारे , रख दूँ तेरे हाथ पर मैं ,,
पर बता तू इस तरह ,मुझसे जुदा क्यों हो गयी |
संसार की हर चीज़ मैंने , ला रखी तेरे सामने ,,
पंकज बता फिर वह मुझे ,क्यों दगा है दे गयी |

रविवार, 11 मई 2014

माँ

सारे जग में माँ से बढ़कर, कोई नहीं हो सकता है |
माता जैसा प्यार कहीं भी, कोई नहीं दे सकता है ||
रात -रात भर जगकर उसने, थपकी देकर मुझे सुलाया |
मीठे - मीठे गीत सुनाकर , संग खेलकर मुझे हँसाया ||
माँ का मुझ पर वरद हस्त हो , विनती करता हूँ भगवान |
माता का सम्मान करूँ मैं , भगवन मुझ को देना ज्ञान ||

शनिवार, 10 सितंबर 2011

कब तक


कब तक सोती रहेगी यों ही सरकार |
कबतक हम खाते रहेंगे यों ही मार |
अभी तो हम २५ मई भूले भी नहीं थे ,
अभी तो हमारे आँसू सूखे भी नहीं थे ,
अभी तो जख्म भरे भी नहीं थे ,
कर दिया ७ सितम्बर को एक और प्रहार |
कब तक सोती रहेगी ...........................|
कभी बनारस , कभी लखनऊ को नापाक किया ,
कभी हैदराबाद ,अहमदाबाद को है दर्द दिया  ,
कभी धन कुबेर मुंबई को है रुला दिया ,
अब तो हमला कर डाला दिल्ली पर अबकी बार |
कब तक सोती रहेगी ................................ |
कब तक सहते रहेंगे हम ,
कब तक चुप रहेंगे हम  ,
देश की जनता पूछ रही है ,
आज पुकार - पुकार   |
कब तक सोती रहेगी ................................ |
वे घायलों को देखने जाते हैं  ,
बड़ा बड़ा काफिला लेकर जातें हैं ,
लम्बी -लम्बी सलामी लेकर ,
रुपयों का मरहम लगाकर ,
वापस आ जाती है उनकी कार |
कब तक सोती रहेगी .................................. |
कहीं सुरक्षा में चूक हुई है ,
कहीं सुरक्षा में है खामी  ,
आतंकवाद की बड़ी लड़ाई ,
का रटा- रटाया मन्त्र,
हम देख रहे हैं ,हम देखेंगे ,
वह कह जाते हर बार   |
कब तक सोती रहेगी .............................. |
कब तक निर्दोषों को,
 मारा जायेगा इस धरती पर ,
कब तक  इस बगिया का
तहस -नहस होते देखेंगे  हम ,
कब तक मूक - बधिर बन हम सब
देखेंगे,  यह आतंकवाद का अत्याचार |
कब तक सोती रहेगी .................................. |
समय आ गया है  ,भारत के जन -जन जागो तुम ,
समय आ गया है ,अपने पौरुष को पहचानो तुम ,
सारी मर्यादायें भंग हुईं हैं ,
सारी सीमायें टूट चुकी हैं ,
रण भेरी बज चुकी यहाँ अब ,
कर दो शंखनाद हुँकार  |
कब तक सोती रहेगी  ..................................  |

हिन्दी में लिखिए

Hindi Blog Tips

TIPS

HONESTY IS THE BEST POLICY
LAUGHTER IS THE BEST MEDICINE
Loading...

समर्थक

मेरे बारे में

मेरी फ़ोटो
नाम : आदेश कुमार पंकज पिता का नाम :( स्व०) श्री किशोरी लाल गुप्ता माता का नाम : श्रीमती पुष्पावती गुप्ता जन्म तिथि : ३०.०६ 1963 जन्म स्थान : शाहजहाँपुर (उ .प्र .) शिक्षा : एम ० एस - सी० ( गणित शास्त्र ) एम ० ए० ( अर्थ शास्त्र ) बी० एड० साहित्यिक परिचय : अनेकों कहानी व् कविताएँ विभिन्न पत्र - पत्रिकाओं में प्रकाशित | आकाशवाणी लखनऊ से बाल कविताएँ प्रचारित | अनेकों कवि सम्मेलनों कि अध्यक्षता व् संचालन | कस्तूरी कंचन आगमन संस्था द्वारा प्रकाशित एवम दोहा कलश संयुक्त दोहाकारों के रूप में प्रकाशाधीन | पुरस्कार : अखिल भारतीय वैश्य समाज शाहजहाँपुर द्वारा वैश्य रत्न से सम्मानित | कई कवि सम्मेलनों में विशेष सम्मान | माननीय शिक्षा मंत्री भारत सरकार श्रीमती स्मृति ईरानी द्वारा सम्मानित | विधालय प्रबंधन द्वारा लगातार आठ वर्षों से सम्मानित | वर्तमान में आदित्य बिरला पब्लिक स्कूल , रेनुसागर , सोनभद्र (उ ,प्र .) में प्रवक्ता गणित शास्त्र के पद पर कार्य रत | संपर्क : जूनियर ४५ - ए रेनुसागर ,सोनभद्र (उ.प्र.)- २३१२१८ मोब .नंबर . ९४५५५६७९८१

arnava

THANKS FOR VISITING