सागर सी गहराई हो
पर्वत सी ऊँचाई हो
रोम - रोम में खुशहाली हो
हर दिल में सच्चाई हो

गुरुवार, 30 अप्रैल 2009

आशुतोष त्रिपाठी की कविता : दस्तूर अनोखा

आतंक है एक गंभीर समस्या , इसके समक्ष है सब हैं लाचार
निरंतर बढती घोर अमावस्या ऊपर से पड़ती मंदी की मार
दुनिया का दस्तूर अनोखा जिसने पाला उसी को धोखा
नेता लगा रहे हैं हम सब की बोली पैसों से भरतें हैं अपनी झोलीं
किसको किसकी परवाह है कौन निभाता है अपनी जिम्मेदारी
अपनी अपनी ढपली देखो अपने अपने राग ,कैसे होगी शांत फैली है जो आग
किसी मोड़ पर हार मिलेगी किसी मोड़ पर जीत
हिम्मत कभी नहीं हारो तुम बन जाओ सहज विनीत

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नाम : आदेश कुमार पंकज पिता का नाम :( स्व०) श्री किशोरी लाल गुप्ता माता का नाम : श्रीमती पुष्पावती गुप्ता जन्म तिथि : ३०.०६ 1963 जन्म स्थान : शाहजहाँपुर (उ .प्र .) शिक्षा : एम ० एस - सी० ( गणित शास्त्र ) एम ० ए० ( अर्थ शास्त्र ) बी० एड० साहित्यिक परिचय : अनेकों कहानी व् कविताएँ विभिन्न पत्र - पत्रिकाओं में प्रकाशित | आकाशवाणी लखनऊ से बाल कविताएँ प्रचारित | अनेकों कवि सम्मेलनों कि अध्यक्षता व् संचालन | कस्तूरी कंचन आगमन संस्था द्वारा प्रकाशित एवम दोहा कलश संयुक्त दोहाकारों के रूप में प्रकाशाधीन | पुरस्कार : अखिल भारतीय वैश्य समाज शाहजहाँपुर द्वारा वैश्य रत्न से सम्मानित | कई कवि सम्मेलनों में विशेष सम्मान | माननीय शिक्षा मंत्री भारत सरकार श्रीमती स्मृति ईरानी द्वारा सम्मानित | विधालय प्रबंधन द्वारा लगातार आठ वर्षों से सम्मानित | वर्तमान में आदित्य बिरला पब्लिक स्कूल , रेनुसागर , सोनभद्र (उ ,प्र .) में प्रवक्ता गणित शास्त्र के पद पर कार्य रत | संपर्क : जूनियर ४५ - ए रेनुसागर ,सोनभद्र (उ.प्र.)- २३१२१८ मोब .नंबर . ९४५५५६७९८१

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