सागर सी गहराई हो
पर्वत सी ऊँचाई हो
रोम - रोम में खुशहाली हो
हर दिल में सच्चाई हो

मंगलवार, 21 अप्रैल 2009

ओम प्रकाश अडिग की कविता :तुम मेरे भविष्य हो

प्रदर्शन के बाद ,
यदि कुछ बचा ,
तो तुम्हें दे जाऊँगा ,
तुम मेरे भविष्य हो ।
हम सब मिलकर -
ख़राब करतें हैं वर्तमान ,
मान या मान ।
तू भी ऐसा ही करेगा ।
सच्चाई हर जगह अच्छी होती है ।
तुमहें भी भुगतना होगा ।
अनास्थाओं के शरीर से -
निकलता हुआ लहू ,
उस लहू से रंगी हुई तस्वीर ,
हम इसी पहाढ़ की खूंटी पर टांग जायेंगे ,
तुम्हारे देखने के लिये ।
शायद प्रदर्शन के बाद इसके अतिरिक्त कुछ भी नही बचेगा ।
लहू और क्या रचेगा
रोशन गंज , शाहजहांपुर ( प्र ) २४२००१

1 टिप्पणी:

  1. The poem tum mere bhavishya ho is a very good poem. I congratulate to writer of this poem ie.sri Om Prakash Adig.
    Dr. Satya Prakash Gupta
    ALLAHABAD

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नाम : आदेश कुमार पंकज पिता का नाम :( स्व०) श्री किशोरी लाल गुप्ता माता का नाम : श्रीमती पुष्पावती गुप्ता जन्म तिथि : ३०.०६ 1963 जन्म स्थान : शाहजहाँपुर (उ .प्र .) शिक्षा : एम ० एस - सी० ( गणित शास्त्र ) एम ० ए० ( अर्थ शास्त्र ) बी० एड० साहित्यिक परिचय : अनेकों कहानी व् कविताएँ विभिन्न पत्र - पत्रिकाओं में प्रकाशित | आकाशवाणी लखनऊ से बाल कविताएँ प्रचारित | अनेकों कवि सम्मेलनों कि अध्यक्षता व् संचालन | कस्तूरी कंचन आगमन संस्था द्वारा प्रकाशित एवम दोहा कलश संयुक्त दोहाकारों के रूप में प्रकाशाधीन | पुरस्कार : अखिल भारतीय वैश्य समाज शाहजहाँपुर द्वारा वैश्य रत्न से सम्मानित | कई कवि सम्मेलनों में विशेष सम्मान | माननीय शिक्षा मंत्री भारत सरकार श्रीमती स्मृति ईरानी द्वारा सम्मानित | विधालय प्रबंधन द्वारा लगातार आठ वर्षों से सम्मानित | वर्तमान में आदित्य बिरला पब्लिक स्कूल , रेनुसागर , सोनभद्र (उ ,प्र .) में प्रवक्ता गणित शास्त्र के पद पर कार्य रत | संपर्क : जूनियर ४५ - ए रेनुसागर ,सोनभद्र (उ.प्र.)- २३१२१८ मोब .नंबर . ९४५५५६७९८१

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