मानसी गुप्ता की बाल कविता ; तितली लिंक पाएं Facebook X Pinterest ईमेल दूसरे ऐप अप्रैल 29, 2009 रंग बिरंगी प्यारी तितली , मेरे घर में आती है ।संग खेलती है वह मेरे , मीठे गीत सुनाती है ।क्ष्रण में दूर चली जाती है , क्ष्रण में पास , वह आ जाती है ।फूलों का रस चूस चूस कर , मीठा शहद पिलाती है । लिंक पाएं Facebook X Pinterest ईमेल दूसरे ऐप टिप्पणियाँ रावेंद्रकुमार रवि29 अप्रैल 2009 को 10:09 am बजेसुंदर प्रयास है!रचनाकार को मेरा आशीष और इससे भी अच्छी रचनाएँ रचने के लिए शुभकामनाएँ!जवाब देंहटाएंउत्तरजवाब देंटिप्पणी जोड़ेंज़्यादा लोड करें... एक टिप्पणी भेजें
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