दोहा लिंक पाएं Facebook X Pinterest ईमेल दूसरे ऐप मई 08, 2010 गोयटा जलता देखकर , गोबर हँसता जाय |पंकज क्यों है हँस रहा , कल तेरी बारी आय || लिंक पाएं Facebook X Pinterest ईमेल दूसरे ऐप टिप्पणियाँ honesty project democracy8 मई 2010 को 9:23 pm बजेउम्दा प्रस्तुतीजवाब देंहटाएंउत्तरजवाब देंहरकीरत ' हीर'8 मई 2010 को 10:45 pm बजेगोयटा जलता देखकर , गोबर हँसता जाय |पंकज क्यों है हँस रहा , कल तेरी बारी आय बहुत खूब .....!!जवाब देंहटाएंउत्तरजवाब देंDr balendu Ghosh9 मई 2010 को 2:18 am बजेबहुत सुंदर दोहाजवाब देंहटाएंउत्तरजवाब देंdr satya prakash9 मई 2010 को 2:19 am बजेशिक्षा प्रद हैजवाब देंहटाएंउत्तरजवाब देंबेनामी9 मई 2010 को 2:19 am बजेbahut khoob Abhinav renusagarजवाब देंहटाएंउत्तरजवाब देंRabindra Prajapati9 मई 2010 को 2:22 am बजेकृपया गोयटा का अर्थ बताने का कष्ट करें .जवाब देंहटाएंउत्तरजवाब देंnilesh mathur9 मई 2010 को 2:44 am बजेबहुत सुन्दर पंक्तियाँ और भाव है !जवाब देंहटाएंउत्तरजवाब देंUnknown10 मई 2010 को 1:19 am बजेबहुत सुंदरजवाब देंहटाएंउत्तरजवाब देंUnknown10 मई 2010 को 2:28 am बजेबहुत सुन्दर !जवाब देंहटाएंउत्तरजवाब देंटिप्पणी जोड़ेंज़्यादा लोड करें... एक टिप्पणी भेजें
उम्दा प्रस्तुती
जवाब देंहटाएंगोयटा जलता देखकर , गोबर हँसता जाय |
जवाब देंहटाएंपंकज क्यों है हँस रहा , कल तेरी बारी आय
बहुत खूब .....!!
बहुत सुंदर दोहा
जवाब देंहटाएंशिक्षा प्रद है
जवाब देंहटाएंbahut khoob
जवाब देंहटाएंAbhinav
renusagar
कृपया गोयटा का अर्थ बताने का कष्ट करें .
जवाब देंहटाएंबहुत सुन्दर पंक्तियाँ और भाव है !
जवाब देंहटाएंबहुत सुंदर
जवाब देंहटाएंबहुत सुन्दर !
जवाब देंहटाएं