पंकज के दोहे
साहस कभी न छोड़िये,देख मुसीबत मीत । रहा अडिग चट्टान सा ,उसने पायी जीत ।। साहस जीवन में भरे ,मित्र सुनो नव रंग । आस पास के लोग सब ,रहते उसके संग।। पंकज साहस व्यक्ति का ,है अचूक हथियार । इसके सफल प्रयोग से ,होती कभी न हार ।। नाव फँसी मझधार में ,मत छोड़ो पतवार । साहस से बढ़ते चलो , हो जाओगे पार ।। साहस से विपदा टले ,मन में रख विश्वास । दुश्मन भी आये नहीं ,पंकज तेरे पास।।

अनार अति गुणकारी!!
जवाब देंहटाएंख़ून और भी होगा लाल - खाओगे यदि लाल अनार!
जवाब देंहटाएंओंठों पर मधु-मुस्कान खिलाती, रंग-रँगीली शुभकामनाएँ!
नए वर्ष की नई सुबह में, महके हृदय तुम्हारा!
संयुक्ताक्षर "श्रृ" सही है या "शृ", उर्दू कौन सी भाषा का शब्द है?
संपादक : "सरस पायस"
आपके ब्लॉग के सभी फ़ॉण्ट बहुत बड़े आकार में दिखाई देते हैं!
जवाब देंहटाएंइन्हें छोटा करने की कृपा कीजिए!