मम्मी
आज मैं अपने ब्लॉग पर १०० वीं कविता प्रस्तुत करते हुए अपार प्रसन्नता का अनुभव कर रहा हूँ | यह सब आप महान साहित्यकारों के प्यार ,सहयोग और आशीर्वाद के कारण ही संभव हो सका है , इसके लिये मैं आप सबका तहे दिल से आभार प्रगट करते हुए शुक्रिया अदा करता हूँ और आशा करता हूँ की भविष्य में भी ऐसे ही सहयोग प्रदान करते रहेंगे | आज मातृ दिवस के विशेष अवसर पर मैं पूजनीय मम्मी के लिये एक कविता प्रस्तुत कर रहा हूँ | आप सभी को मातृ दिवस की हर्दिक शुभकामनायें | प्यारी - प्यारी मेरी मम्मी | सारे जग से न्यारी मम्मी | तुझसे ऊँचा कोई नहीं है , बहुत दुलारी मेरी मम्मी | रोज सवेरे जगती मम्मी | मुझमें ध्यान लगाती मम्मी | एक -एक आँसू पर मेरे , आँसू- धार बहाती मम्मी | गुर्वोपरि है मेरी मम्मी | देवोपरि है मेरी मम्मी | चलना उसने मुझे सिखाया , मेरी प्राणाधार है मम्मी | सभी दुःख हर लेती मम्मी | हम पर प्यार लुटाती मम्मी | अर्पण कर देती है तन -मन , ममता -मूर्ति है मेरी मम्मी |

अनार अति गुणकारी!!
जवाब देंहटाएंख़ून और भी होगा लाल - खाओगे यदि लाल अनार!
जवाब देंहटाएंओंठों पर मधु-मुस्कान खिलाती, रंग-रँगीली शुभकामनाएँ!
नए वर्ष की नई सुबह में, महके हृदय तुम्हारा!
संयुक्ताक्षर "श्रृ" सही है या "शृ", उर्दू कौन सी भाषा का शब्द है?
संपादक : "सरस पायस"
आपके ब्लॉग के सभी फ़ॉण्ट बहुत बड़े आकार में दिखाई देते हैं!
जवाब देंहटाएंइन्हें छोटा करने की कृपा कीजिए!