आँसू लिंक पाएं Facebook X Pinterest ईमेल दूसरे ऐप अप्रैल 03, 2010 कभी बनकर निकलते हैं ,दिलों बहार यह आँसू |कभी बनकर छलकते हैं ,ग़मों बौछार यह आँसू |मंथन यहाँ होता ,दिलों - दिमाग पर जब हैं |हैं , दिखाते जिन्दगी की ,तस्वीर यह आँसू | लिंक पाएं Facebook X Pinterest ईमेल दूसरे ऐप टिप्पणियाँ श्यामल सुमन3 अप्रैल 2010 को 6:44 pm बजेमैल हृदय का धुल सके बहते आँसू खास।कोशिश भी बेहतर लगी करते रहें प्रयास।।सादर श्यामल सुमन09955373288www.manoramsuman.blogspot.comजवाब देंहटाएंउत्तरजवाब देंआदेश कुमार पंकज3 अप्रैल 2010 को 6:50 pm बजेधन्यवाद भाई श्यामल सुमन जीमहत्व पूर्ण टिप्पणी के लिएआपका प्रोत्साहन ही हमारा साहस हैजवाब देंहटाएंउत्तरजवाब देंDr. C S Changeriya4 अप्रैल 2010 को 1:59 am बजेBILKUL SAHI YE AASUN BADE KAM KI CHIZ HE GAM HO YA KHUSI HAR ME AA JATE HE http://kavyawani.blogspot.com/SHEKHAR KUMAWATजवाब देंहटाएंउत्तरजवाब देंटिप्पणी जोड़ेंज़्यादा लोड करें... एक टिप्पणी भेजें
मैल हृदय का धुल सके बहते आँसू खास।
जवाब देंहटाएंकोशिश भी बेहतर लगी करते रहें प्रयास।।
सादर
श्यामल सुमन
09955373288
www.manoramsuman.blogspot.com
धन्यवाद भाई श्यामल सुमन जी
जवाब देंहटाएंमहत्व पूर्ण टिप्पणी के लिए
आपका प्रोत्साहन ही हमारा साहस है
BILKUL SAHI YE AASUN BADE KAM KI CHIZ HE GAM HO YA KHUSI HAR ME AA JATE HE
जवाब देंहटाएंhttp://kavyawani.blogspot.com/
SHEKHAR KUMAWAT