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हर दिल में सच्चाई हो

सोमवार, 3 मई 2010

अब तो आकर के जरा

तन्हाइयों के बीच गुम- सुम ,
मैं कब तलक  बैठा रहूँ  |
अब तो आकर के जरा  ,
कुछ तो मुझे समझाइये |
नयन व्याकुल हो रहें हैं ,
दरश को -तेरे लिये   |
अब तो आकर के जरा ,
दर्शन मुझे दिखलाइये  |
गम मिला जीवन में मुझको ,
शिकवा नहीं करता हूँ मैं  |
अब तो आकर के जरा ,
उस दर्द को सहलाइये |
आँसू नयन के चाहते हैं ,
राज कहना सब जगह  |
अब तो आकर के जरा ,
पलकों पर मेरी छा जाइये  |
 

12 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत सुंदर ग़ज़ल

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  2. एक बेहतरीन रचना
    काबिले तारीफ़
    सुन्दर भावाव्यक्ति .साधुवाद
    satguru-satykikhoj.blogspot.com

    उत्तर देंहटाएं
  3. बहुत बढ़िया रचना छोटी होते हुए भी अपने अर्थों में पूर्ण.."

    उत्तर देंहटाएं
  4. सभी प्रशंसकों का हृदय से आभारी हूँ | आपके द्वारा हमारा उत्साह वर्धन ही हमारा सम्बल है |

    उत्तर देंहटाएं
  5. बहुत बढ़िया

    उत्तर देंहटाएं

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मेरे बारे में

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नाम : आदेश कुमार पंकज पिता का नाम :( स्व०) श्री किशोरी लाल गुप्ता माता का नाम : श्रीमती पुष्पावती गुप्ता जन्म तिथि : ३०.०६ 1963 जन्म स्थान : शाहजहाँपुर (उ .प्र .) शिक्षा : एम ० एस - सी० ( गणित शास्त्र ) एम ० ए० ( अर्थ शास्त्र ) बी० एड० साहित्यिक परिचय : अनेकों कहानी व् कविताएँ विभिन्न पत्र - पत्रिकाओं में प्रकाशित | आकाशवाणी लखनऊ से बाल कविताएँ प्रचारित | अनेकों कवि सम्मेलनों कि अध्यक्षता व् संचालन | कस्तूरी कंचन आगमन संस्था द्वारा प्रकाशित एवम दोहा कलश संयुक्त दोहाकारों के रूप में प्रकाशाधीन | पुरस्कार : अखिल भारतीय वैश्य समाज शाहजहाँपुर द्वारा वैश्य रत्न से सम्मानित | कई कवि सम्मेलनों में विशेष सम्मान | माननीय शिक्षा मंत्री भारत सरकार श्रीमती स्मृति ईरानी द्वारा सम्मानित | विधालय प्रबंधन द्वारा लगातार आठ वर्षों से सम्मानित | वर्तमान में आदित्य बिरला पब्लिक स्कूल , रेनुसागर , सोनभद्र (उ ,प्र .) में प्रवक्ता गणित शास्त्र के पद पर कार्य रत | संपर्क : जूनियर ४५ - ए रेनुसागर ,सोनभद्र (उ.प्र.)- २३१२१८ मोब .नंबर . ९४५५५६७९८१

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